रायगढ़ :-भाजपा के दो दिवसीय जिला प्रशिक्षण महाअभियान के षष्ठम सत्र में जब क्रेडा अध्यक्ष एवं पूर्व प्रदेश महामंत्री मा. भूपेन्द्र सवन्नी जी ‘कार्यकर्ता विकास, आचरण, गुण और दायित्व बोध’ विषय पर बोलने उठे, तो पूरा पंडाल राष्ट्रवाद की ऊर्जा से भर उठा। उनके शब्दों में तप था, तेज था और था संगठन का तपोबल। मंच से गरजते हुए श्री सवन्नी ने कहा, “भाजपा के लिए राजनीति पीड़ित मानव की सेवा है। दो सीटो से पूर्ण बहुमत की सरकार के लिए पार्टी से जुड़े असंख्य लोगों के अपना जीवन होम कर दिया। अपना नाम देकर राष्ट्र के नाम ऊंचा करते हैं। यहां पद प्रतिष्ठा नहीं, परीक्षा है। यहां कुर्सी इनाम नहीं, इम्तिहान है।”
उन्होंने कार्यकर्ता को ‘राष्ट्र का रक्षक’ बताते हुए कहा, “आचरण कार्यकर्ताओं की पहचान है, गुण उनकी पूंजी है, और दायित्व बोध तुम्हारा कवच है। जब तक कार्यकर्ता के भीतर ‘राष्ट्र प्रथम, स्वयं अंतिम’ का भाव नहीं जगेगा, तब तक कोई भी योजना कागज से जमीन तक नहीं उतरेगी।”
*चाणक्य नीति से वर्तमान का सूत्र*
श्री सवन्नी ने चाणक्य को उद्धृत करते हुए कहा, “आचार्य चाणक्य ने कहा था—जब तक राजनीति राष्ट्र की प्रयोगशाला नहीं बनेगी, राष्ट्र खोखला रहेगा। आज मैं गर्व से कहता हूं, भारतीय जनता पार्टी उसी प्रयोगशाला का हेडमास्टर है। यहां हर कार्यकर्ता एक वैज्ञानिक है जो ‘अंत्योदय’ के फॉर्मूले से भारत को परम-वैभव तक ले जाने के प्रयोग में लगा है।”
*बंगाल से दिल्ली तक: असंभव को संभव का मंत्र*
उन्होंने कार्यकर्ताओं में हुंकार भरते हुए कहा, “दुनिया कहती थी पश्चिम बंगाल में कमल नहीं खिल सकता। हमने 3 से 77 कर दिखाया। कहते थे उड़ीसा में भाजपा का सूर्योदय असंभव है। हमने वहां भगवा लहरा दिया। दिल्ली में ‘नामुमकिन’ का ताला तोड़कर ‘मुमकिन’ की सरकार बनाई। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि भाजपा का कार्यकर्ता सत्ता के लिए नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ता है।”
*आचरण ही संगठन का आईना*
श्री सवन्नी ने स्पष्ट किया, “जनता तुम्हारा भाषण बाद में सुनती है, आचरण पहले देखती है। तुम्हारी नम्रता, तुम्हारी पारदर्शिता, तुम्हारी निष्ठा ही पार्टी का चरित्र गढ़ती है। याद रखो, कार्यालय की एक-एक पाई जनता की अमानत है और बूथ की एक-एक गली भारत-माता की धमनी है।”
*दायित्व बोध: अंतिम व्यक्ति तक कमल*
उन्होंने आह्वान किया, “दायित्व बोध का अर्थ है—जब तक अंतिम पंक्ति का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा में नहीं आ जाता, तब तक चैन से न बैठना। गरीब की झोपड़ी तक सरकार पहुंचाना ही तुम्हारा ‘राजधर्म’ है।”
सत्र की समाप्ति पर पूरा पंडाल ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ और ‘लेने नहीं, देने आए हैं’ के उद्घोष से गूंज उठा। अध्यक्षता कर रहे राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह जी ने कहा कि श्री सवन्नी का उद्बोधन हर कार्यकर्ता के लिए ‘आचरण-संहिता’ है।









