शहडोल। शहडोल भले ही टाइगर रिजर्व जिला न हो, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चार बड़े टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारा बन गया है। जिले के घने जंगल, पानी के प्राकृतिक स्रोत और भोजन की प्रचुरता बाघ, हाथी, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यप्राणियों को आकर्षित कर रही है।
कॉरिडोर के रूप में काम कर रहा है
वन विभाग के अनुसार शहडोल का वन क्षेत्र बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय गांधी टाइगर रिजर्व सीधी और छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। दक्षिण वन मंडल का क्षेत्र विशेष रूप से अचानकमार, बांधवगढ़ और कान्हा के बीच कॉरिडोर के रूप में काम कर रहा है।
वन्यजीवों की यह आवाजाही प्राकृतिक प्रक्रिया है
बाघ नए क्षेत्र की तलाश, आवास विस्तार और भोजन के लिए सैकड़ों किलोमीटर तक विचरण करते हैं। हाथी भी अपने पारंपरिक मार्गों से लंबी दूरी तय करते हैं। छत्तीसगढ़ से हाथियों का बांधवगढ़ तक पहुंचना अनूपपुर और शहडोल के इसी गलियारे से होकर संभव हुआ है। 2018 के आसपास बांधवगढ़ में हाथियों का आगमन शुरू हुआ था, जिसके पीछे शहडोल के गलियारे की बड़ी भूमिका रही है।
वन्यजीव भटककर आबादी में घुस जाते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीव गलियारे केवल जंगल नहीं होते, इनमें नदियां, पहाड़ियां, गांव और आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल होते हैं। इनके सुरक्षित रहने से वन्यजीवों को एक जंगल से दूसरे जंगल तक जाने में आसानी होती है और जीन पूल बना रहता है। यदि इन मार्गों पर कटाई, निर्माण या अतिक्रमण से व्यवधान होता है तो वन्यजीव भटककर आबादी में घुस जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
इसीलिए वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जंगल या गांव के आसपास बाघ-हाथी दिखने पर करीब न जाएं, घेरें नहीं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
संरक्षण पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए अहम
विभाग का कहना है कि जंगलों में पानी और भोजन बनाए रखना और गलियारों को सुरक्षित रखना जैव विविधता के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। साल के घने वन शहडोल की प्राकृतिक विरासत हैं, जिनका संरक्षण पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए अहम है।








