बिलासपुर में बर्खास्त जीआरपी कॉन्स्टेबल लक्ष्मण गाईन ने आय से अधिक जुटाए एक करोड़, आरोपपत्र में खुलासा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मामलों में न्यायालयों में आरोपपत्र दाखिल कर दिए हैं। जांच एजेंसी ने बिलासपुर में रेलवे पुलिस (जीआरपी) के बर्खास्त आरक्षक लक्ष्मण गाईन के खिलाफ आय से अधिक एक करोड़ तीन लाख रुपये से अधिक की अघोषित संपत्ति अर्जित करने के मामले में विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया है।

इसके साथ ही कोंडागांव जिले के बड़े डोंगर स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में 36 लाख 79 हजार रुपये से अधिक के गबन मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक भावेश विश्वकर्मा के खिलाफ करीब 15 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया है।

बर्खास्त आरक्षक लक्ष्मण गाईन की अकूत संपत्ति उजागर

बिलासपुर एसीबी द्वारा विशेष न्यायालय में पेश किए गए आरोपपत्र के अनुसार, जीआरपी के बर्खास्त आरक्षक लक्ष्मण गाईन के पास सेवाकाल के दौरान वैध स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति पाई गई है। ब्यूरो की विस्तृत जांच में सामने आया कि आरक्षक की कुल ज्ञात आय 86.76 लाख रुपये थी, जबकि इस अवधि में उसका कुल व्यय और संपत्तियों में निवेश 1.90 करोड़ रुपये आंका गया। इस तरह उसने अपनी ज्ञात आय से 1,03,33,033.50 रुपये अधिक खर्च किए।

वर्ष 2024 में हुई थी कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि 1 दिसंबर 2024 को एसीबी की टीम ने लक्ष्मण गाईन के बिलासपुर स्थित निवास सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें काली कमाई के पुख्ता दस्तावेज मिले थे। लक्ष्मण गाईन पर जीआरपी में तैनाती के दौरान गांजा जब्ती और अवैध वसूली से जुड़ा मामला भी दर्ज है, जिसके चलते उन्हें 19 नवंबर 2024 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

आईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग कर बैंक प्रबंधक ने किया गबन

दूसरे मामले में ईओडब्ल्यू ने कोंडागांव की विशेष अदालत में बैंक ऑफ इंडिया की बड़े डोंगर शाखा के तत्कालीन प्रबंधक भावेश विश्वकर्मा के खिलाफ चालान पेश किया। जांच के अनुसार, आरोपित 25 जून 2019 से 18 जनवरी 2022 तक शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ था। इस दौरान उसने बैंक के अन्य साथी अधिकारियों की जानकारी के बिना उनकी यूजर आईडी और पासवर्ड का अनधिकृत इस्तेमाल किया।

अवैध रूप से निकाले 36 लाख

आरोपित ने कार्यालयीन खातों, फसल बीमा खाते, ग्राहकों के बचत व ऋण खातों और महिला स्वयं सहायता समूहों के खातों से अवैध रूप से 36 लाख 79 हजार 323 रुपये निकाले और इसे बैंक ऑफ बड़ौदा में स्थित अपने व्यक्तिगत खाते सहित अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया।

कसेगा कानूनी शिकंजा

बैंक प्रबंधन ने 4 अप्रैल 2022 को इस वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी और 27 सितंबर 2022 को आरोपित प्रबंधक को बर्खास्त कर दिया गया था। अब दोनों ही मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा ठोस साक्ष्यों के साथ चालान पेश किए जाने के बाद न्यायालयीन विचारण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे दोनों आरोपितों पर कानून का शिकंजा और कसना तय है।

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Author: samachardoot

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