ग्वालियर। साइबर ठगी के शिकार लोगों को उनकी डूबी रकम जल्द वापस दिलाने के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था अब खुद एक उलझन में फंस गई है। पहले जहां पीड़ितों को बैंक खाते में फ्रीज हुई राशि वापस पाने के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब केंद्र सरकार के एमआरएम (मनी रिस्टोरेशन माडयूल) पोर्टल के जरिए 50 हजार रुपये तक की राशि को बिना कोर्ट गए अनफ्रीज करने की राहत दी गई है। लेकिन मध्यप्रदेश में यह पूरी प्रक्रिया ‘क्षतिपूर्ति बांड’ (इंडेमनिटी बांड) के एक बड़े पेंच में उलझकर रह गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आई4सी यानि इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर की इस नई पहल के तहत राशि रिलीज कराने के लिए पीड़ित को संबंधित बैंक में आवेदन के साथ ‘क्षतिपूर्ति बांड’ जमा करना होता है। लेकिन मुसीबत यह है कि मध्यप्रदेश में इस बांड की कीमत एक हजार रुपये तय है, पीड़ित 50-100 रुपये के स्टांप के साथ आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं।
अज्ञानता और नियम की दोहरी मार
25 हजार या इससे अधिक की ठगी में भी ई-एफआईआर
चक्कर काटने की मजबूरी
- अमान्य आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे ठगी के शिकार लोगों को राहत मिलने की बजाय दोबारा परेशान होना पड़ रहा है। हर थाने में ऐसे पीड़ित पहुंच रहे हैं।
- पड़ोसी राज्यों से 10 गुना अधिक अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में क्षतिपूर्ति बांड की कीमत एक हजार रुपये 10 गुना अधिक शुल्क होने के कारण यह राहत योजना पीड़ितों के लिए परेशानी साबित हो रही है।










