देवास। देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से ठगी की रकम में से 54 लाख 84 हजार 725 रुपये बरामद किए गए हैं।

गिरोह के सदस्यों ने पुलिस, सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स जैसी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को फोन और वीडियो कॉल किए और गिरफ्तारी का भय दिखाकर बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करवाए।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कुल 63.52 लाख रुपये की ठगी की थी। आरोपितों तक पहुंचने के लिए देवास पुलिस की 70 सदस्यीय टीमों ने लंबे समय तक अभियान चलाया। कार्रवाई के लिए 19 टीमें बनाई गई थीं, जिन्होंने 127 दिनों तक देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी। इस दौरान पुलिस टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की।
4 अप्रैल को मिली शिकायत, शुरू हुई जांच
एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि देवास के कोतवाली थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया। दवा कंपनी से सेवा निवृत अधिकारी सुरेश इंग्ले, निवासी केलादेवी क्षेत्र, ने 4 अप्रेल को हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले में तत्काल ई जीरो एफआईआर की गई और पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान सामने आया कि साइबर ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम मंगवाई थी। आरोपितों की पहचान के लिए पुलिस ने बैंक खातों की जानकारी जुटाने के साथ संबंधित बैंक शाखाओं में जांच की। बैंक सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गिरोह से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ना शुरू किया।
17 राज्यों में पहुंची पुलिस की टीमें
तकनीकी जांच से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीमों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश और दिल्ली सहित 17 राज्यों में कार्रवाई की। टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों को गिरफ्तार किया और उनसे ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल फोन सहित अन्य तकनीकी साक्ष्य बरामद किए।
पुलिस की लगातार कार्रवाई के परिणामस्वरूप गिरोह के 12 सदस्यों को अलग-अलग समय में गिरफ्तार किया गया। इनके पास से ठगी की रकम में से 54 लाख 84 हजार 725 रुपये जब्त किए गए हैं।
इन 12 आरोपितों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने जिन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनमें भूराराम राव निवासी ग्राम अरटिया, जिला पाली, राजस्थान, मालाराम मेघवाल निवासी ग्राम रामसीसर भेड़वालिया, जिला चूरू, राजस्थान, नाजिम खान निवासी विशाल मार्केट, जिला कोटा, राजस्थान और थोटुकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा निवासी गुडिमुला, जिला ईस्ट गोदावरी, आंध्रप्रदेश शामिल हैं।
इसके अलावा वैभव शुक्ला निवासी वर्ल्ड बैंक कॉलोनी बर्रा, जिला कानपुर, उत्तरप्रदेश, मुकराम मेघा निवासी राजुला कॉलोनी जंगरेड्डीगुडम, जिला एलुरु, आंध्रप्रदेश, आयुष गुप्ता निवासी वर्ल्ड बैंक कॉलोनी बर्रा, जिला कानपुर, उत्तरप्रदेश और केयूर कुमार निवासी केवल नगर रगोली, जिला वडोदरा, गुजरात को भी गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपितों में मोहम्मद अब्दुल्ला निवासी भवली, आलम नगर, जिला मधेपुर, बिहार, अनिल कुमार निवासी ग्राम लोकीकेरे, जिला दावणगेरे, कर्नाटक, गिरिश कुमार येलेन्टि निवासी उप्पर, पल्लम, जिला नेल्लोर, आंध्रप्रदेश और कमल कांति निवासी नंदीग्राम, पक्षिम बंगाल भी शामिल हैं।
मोंटू को प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक गिरोह से जुड़े आरोपित मोंटू उर्फ दीपेश निवासी जयपुर, राजस्थान को गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर देवास लाया जाएगा। पुलिस उससे भी साइबर ठगी के नेटवर्क और अन्य आरोपितों से जुड़े पहलुओं के संबंध में पूछताछ करेगी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपितों से ठगी में इस्तेमाल बैंक खाते, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।
127 दिन चला अभियान
देवास पुलिस का यह अभियान 127 दिनों तक चला। 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमों ने 17 राज्यों के 33 जिलों में आरोपितों की तलाश की। अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई के दौरान टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की। पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान कुल 54.84 लाख रुपये की राशि जब्त की गई। एसपी पुनीत गेहलोद ने इस कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम की सराहना करते हुए उन्हें 10 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।










