खिरकिया (खंडवा)। लगातार हो रही वर्षा के कारण धनवाड़ा क्षेत्र में माचक नदी का जलस्तर बढ़ जाने से तीन लोग नदी के बीच स्थित घर एवं पेड़ पर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जानकारी के अनुसार जयसिंह पुत्र अजबसिंह, रूपचंद पुत्र टीकाराम एवं गणेश पुत्र शिवप्रसाद नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बीच में स्थित घर एवं पेड़ पर फंस गए थे।
सूचना मिलते ही एसडीएम खिरकिया शिवांगी बघेल, तहसीलदार लवीना घाघरे तथा एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।टीम ने त्वरित एवं सुनियोजित रेस्क्यू अभियान चलाकर तीनों व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वर्षा ऋतु के दौरान नदी-नालों के समीप जाने अथवा जलभराव वाले क्षेत्रों को पार करने का प्रयास न करें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना दें तथा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
काली माचक नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया
हरदा/मांडला। मूसलाधार बारिश के कारण मांडला में काली माचक नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पुल पर करीब 3 फीट तक पानी आ जाने से नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर करीब 11.30 घंटे तक वाहनों के पहिए थमे रहे। बाढ़ के तेज बहाव के कारण पुल की रेलिंग टूटकर हाईवे पर आ गई, जिसे बाद में जेसीबी की मदद से हटाया गया। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की एक किलोमीटर से भी अधिक लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी ज्यादा खराब रही। भारी बारिश के चलते रोलगांव-कालकुंड मार्ग पूरे 21.30 घंटे तक पूरी तरह बंद रहा।
बाढ़ में फंसे 3 लोगों का रेस्क्यू, जिले में रिकॉर्ड बारिश
हरदा जिले में पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 4.21 इंच औसत बारिश दर्ज की गई है, जिसमें सिराली क्षेत्र में सर्वाधिक 5.78 इंच पानी गिरा। माचक नदी के अचानक उफान पर आने से धनवाड़ा में पेड़ और घर पर फंसे तीन ग्रामीणों—जय सिंह, रूपचंद और गणेश को एसडीईआरएफ (SDERF) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला।
समय पर कॉलेज नहीं पहुंच पाए छात्र, छूटी परीक्षा
दूसरी ओर, घोंघई नदी में आई बाढ़ के चलते सिराली शासकीय महाविद्यालय के कई विद्यार्थी समय पर कॉलेज नहीं पहुंच सके। अपनी परीक्षा देने के लिए कुछ छात्रों ने ट्रैक्टर के सहारे उफनती नदी को पार करने का जोखिम भी उठाया, लेकिन इसके बावजूद समय पर न पहुंच पाने के कारण कई छात्र बीएससी और बीकॉम फर्स्ट ईयर की परीक्षा देने से वंचित रह गए।









