रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले ने छत्तीसगढ़ की परीक्षा व्यवस्था और सरकारी निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर पुलिस ने मामले का 36 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा करते हुए भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मामले में दो अन्य आरोपित अभी फरार हैं।
पुलिस की जांच के मुताबिक प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र वाले लिफाफे में छेद कर मोबाइल की मदद से उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री तैयार कर छात्रों को कथित तौर पर 11 हजार रुपये में उपलब्ध कराई गई। पुलिस का कहना है कि पेपर खरीदने वाले पांचों गिरफ्तार छात्र भारती एग्रीकल्चर कॉलेज से जुड़े हैं।
लिफाफे में छेद कर बनाया वीडियो, फिर छात्रों तक पहुंचा पेपर
पुलिस के मुताबिक आरोपी प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करते हुए लिफाफे में छेद किया और मोबाइल से प्रश्नपत्र का वीडियो बनाया। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र की सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि अजय नायक ने प्रश्नपत्र चार अन्य छात्रों तक पहुंचाया।
मामले में रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में पुलिस टीमों ने कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने करीब 36 घंटे तक जांच और आरोपितों की तलाश में काम किया।
छह मोबाइल और 11 हजार रुपये समेत कई सामान जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान छह मोबाइल फोन, 11 हजार रुपये तथा कथित तौर पर पेपर लीक में इस्तेमाल किए गए सामान को जब्त किया है। इनमें सुई, सुजा, कॉपी, फेविकोल और वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े उपकरण शामिल बताए गए हैं।
मामले में तेलीबांधा थाने में सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस कार्रवाई पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
लेकिन बड़ा सवाल—परीक्षा की गोपनीयता की जिम्मेदारी किसकी?
पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर अपनी कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन इस घटना ने छत्तीसगढ़ सरकार और परीक्षा व्यवस्था की निगरानी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसी व्यक्ति द्वारा मोबाइल से रिकॉर्ड कर छात्रों तक पहुंचाया जा सकता है, तो प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर उसके वितरण और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या संबंधित अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया था? और यदि व्यवस्था में खामी थी, तो इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
क्या केवल गिरफ्तारी से खत्म होगी जिम्मेदारी?
पेपर लीक जैसे मामलों में कार्रवाई केवल आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छात्रों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़े इस मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि गोपनीय प्रश्नपत्र तक पहुंच कैसे बनी और निगरानी व्यवस्था कहां विफल हुई।
राज्य सरकार के सामने अब सवाल है कि क्या पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी? क्या परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी? यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल में लापरवाही सामने आती है, तो क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
छात्रों के हित में परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करना चुनौती
प्रश्नपत्र लीक की घटना का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की। ऐसे मामलों में सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने केवल दोषियों को पकड़ने की चुनौती नहीं होती, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया पर छात्रों का भरोसा बहाल करने की जिम्मेदारी भी होती है।
रायपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बावजूद अब निगाहें राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर हैं कि वे मामले की पूरी जिम्मेदारी तय करने, परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
फिलहाल पुलिस ने छह आरोपितों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है, जबकि दो अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। मामले की आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा परीक्षा सुरक्षा तंत्र में किस स्तर पर चूक हुई।










